विभव और विभवान्तर (Potential and Potential Difference) in Hindi
विभव और विभवान्तर (Potential and Potential Difference)
विभव Potential
इकाई आवेश को अनन्तता (infinity) से किसी बिन्दु तक लाने में किया गया कार्य उस बिन्दु का विभव कहलाता है। दूसरे शब्दों में किसी वस्तु का वैद्युतिक स्तर जिसे यह निर्देशित होता है कि विद्युत धारा वस्तु से पृथ्वी की ओर अथवा पृथ्वी से वस्तु की ओर प्रवाहित होगी, उस वस्तु का विभव Potential कहलाता है।" यह धनात्मक अथवा ऋणात्मक होता है।
एकांक स्वतंत्र धनावेश को अनंत से विद्युत्-क्षेत्र के किसी बिन्दु तक लाने में जितना कार्य करना पड़ता है, उसे उस बिन्दु का विद्युत् विभव Potential कहते हैं। विभव एक अदिश राशि है ।
किसी चालक का विभव उसकी वह विद्युत अवस्था है जिस पर विद्युत के प्रभावित होने की दशा निर्भर करती है। यदि वह अन्य चालक को विद्युत संपर्क में हो।
धनात्मक विभव Positive Potential (+)
जब विद्युत धारा पृथ्वी की ओर प्रवाहित होती है तो वस्तु का विभव Potential धनात्मक होता है।
ऋणात्मक विभव Negative Potential (-)
जब विद्युत धारा पृथ्वी से वस्तु की ओर प्रवाहित होती है तो वस्तु का विभव Potential ऋणात्मक होता है।
विभवान्तर Potential Difference
किन्हीं दो बिन्दुओं के विद्युत विभवों के अंतर को विभवान्तर हते हैं। जब किसी चालक (या प्रतिरोधक) में से विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो उसके सिरों के विभवों में कुछ अन्तर पैदा हो जाता है जिसे विभवान्तर Potential Difference हते हैं।
किसी इलेक्ट्रिकल सर्किट में दो बिंदुओं के बीच प्राप्त वोल्टेज को विभवान्तर Potential Difference कहते हैं यह हमेशा EMF कम होता है।
विभवान्तर Potential Difference और विद्युत वाहक बल Electromotive force को वोल्टेज में व्यक्त किया जाता है।
विभवान्तर का मात्रक Unit of Potential Difference
विभवान्तर का प्रतीक V और मात्रक वोल्ट है।
एक वोल्ट One Volt
किसी एक ओह्म प्रतिरोध मान वाले चालक में से एक एम्पियर विद्युत धारा प्रवाहित होने पर उसके सिरों पर पैदा हुए विभवान्तर का मान एक वोल्ट होता है।
पृथ्वी का विभव Potential of the Earth
हम जानते हैं कि किसी भी स्थान की ऊँचाई समुद्र तल की ऊँचाई को मानक (Standard) शून्य मानकर की जाती है। इसका कारण यह है कि समुद्र से कितना भी पानी निकालें या उसमें कितना भी पानी डालें उसके जल स्तर में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं होता है।
ठीक इसी प्रकार किसी वस्तु के विभव की माप पृथ्वी के विभव को मानक मानकर की जाती है। पृथ्वी के मानक विभव Potential को शून्य माना जाता है। पृथ्वी के विभव को मानक मानने का कारण यह है कि पृथ्वी की धारिता (Capacity) इतनी अधिक होती है कि उसे कितना भी आवेश दें या उससे कितना भी आवेश लें उसके विभव में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं होता है।
जिस वस्तु में धनावेश होता है उसका विभव धनात्मक अर्थात् शून्य से अधिक (या पृथ्वी के विभव से अधिक) होता है । जिस वस्तु में ऋणावेश होता है उस वस्तु का विभव ऋणात्मक अर्थात् शून्य से कम (पृथ्वी के विभव से कम) होता है।
जब धनावेशित चालक को पृथ्वी से जोड़ते हैं, तो चालक का धनावेश पृथ्वी में समा जाता है और चालक विद्युत् रूप से उदासीन neutral हो जाता है। अतः उसका विभव शून्य हो जाता है। वास्तव में जब धनावेशित चालक को पृथ्वी से जोड़ते हैं, तो इलेक्ट्रॉन पृथ्वी से निकलकर चालक में चले जाते हैं। फलस्वरूप चालक आवेश रहित हो जाता है।
इसी प्रकार जब ऋणावेशित चालक को पृथ्वी से जोड़ते हैं, तो पृथ्वी का धनावेश चालक में चला जाता है जिससे चालक विद्युत् रूप से उदासीन neutral हो जाता है। अतः उसका विभव शून्य हो जाता है। वास्तव में जब ऋणावेशित चालक को पृथ्वी से जोड़ते हैं, तो चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉन पृथ्वी में चले जाते हैं जिससे चालक आवेश रहित हो जाता है।
विभवान्तर की माप Measurement of Potential Difference
विभवान्तर Potential Difference को मापने के लिए हम वोल्टमीटर का उपयोग करते है। इस चित्र से समझते हे की हम वोल्टेज कब और कैसे मापते है।
चित्र 1 में दिखाए गए की बैटरी की दोनों टर्मिनल से 1 वोल्ट मीटर को कनेक्ट किया गया है मगर उसके साथ कोई भी लोड कनेक्ट नहीं है। इस अवस्था में वोल्टमीटर भी जो भी वैल्यू दिखाएगा उसे हम EMF कहेंगे।
or
चित्र 2 में दिखाए गए की बैटरी की दोनों टर्मिनल से 1 वोल्ट मीटर के साथ 1 रेजिस्टेंस को भी कनेक्ट किया गया है। इस अवस्था में वोल्टमीटर भी जो भी वैल्यू दिखाएगा उसे हम विभवान्तर Potential Difference कहेंगे।
इसका अर्थ है जब बैटरी पर लोड होता है तो वोल्टमीटर पर जो भी वैल्यू दिखाएगा उसे विभवान्तर Potential Differenceकहते हैं और जब बैटरी पर कोई भी लोड कनेक्ट नहीं है और वोल्टमीटर भी जो भी वैल्यू दिखाएगा उसे हम EMF कहेंगे।
इन्हें याद रखें
1. किसी चालक का विभव उसकी वह विद्युतीय अवस्था है जिस पर विद्युत् के प्रवाहित होने की दिशा निर्भर करती है, यदि वह अन्य चालक के विद्युत् सम्पर्क में हो। आवेश अधिक विभव वाले चालक से कम विभव वाले चालक की ओर तब तक प्रवाहित होता है, जब तक कि दोनों चालकों का विभव समान नहीं हो जाता। इसके विपरीत, इलेक्ट्रॉन कम विभव वाले चालक से अधिक विभव वाले चालक की ओर प्रवाहित होता है।
2. पृथ्वी का विभव शून्य माना जाता है।
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